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Abstract

किसी भी दार्शनिक सम्प्रदाय में प्रमाण की महत्ता उतनी ही सर्वोपरि है, जितनी कि उनके सिद्धान्त, क्योंकि उनके सिद्धान्त तभी तार्किक, युक्तिसंगत व विश्वसनीय माने जा सकते हैं, जब उनमें कोई प्रबल प्रमाण हो ,  अतः सभी भारतीय दार्शनिक सम्प्रदायों ने मुक्त कष्ठ से इसे स्वीकार किया है ।

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