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Abstract

मुग़ल कालीन भारत में क्योंकि भू -राजस्व राज्य की आय का एक प्रमुख स्रोत था, इसलिए भूमि पर अधिकारों की दावेदारी एक महत्वपूर्ण विषय हुआ करता था।  यूँ तो भूमि पर उच्च अभिजात्य वर्ग का अधिकार था। परन्तु फिर भी सामाजिक रूप से यह पड़ताल करना की तत्कालीन सामाजिक वर्गों में से भिनं -भिंन वर्गों को भू -सम्पति के अधिकार थे ,तथा उन अधिकारों की प्रकृति कैसी थी,एक महत्वपूर्ण शोध प्रश्न है।

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