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Abstract

रू समकालीन समय में भी मीडिया के बढ़ते प्रचार प्रसार में लोक मानस की भाव भूमि कथानक के तौर पर सजीव पात्रों में नजर आती है। आज भी हमारे संस्कारों में लोक नाट्य व काव्य में मिली विचार धारा समाहित है। हमारी संस्कृति की विविध विचारधाराओं में अपने अंदर समाहित जीवन के सार को अगली पीढ़ी में संस्कार स्वरूप सौपा है। प्रस्तुत शोध पत्र मे ये विश्लेषण किया जाता है कि आधुनिक जीवन मे भी लोक नाट्य व काव्य का स्थान बहुत महत्वपूर्ण व जीवन शैली को प्रभावित करने वाला है।

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